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पीपीई किट पहनकर ही पोल्ट्री फार्म में करें कार्य

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बिलासपुर। जिले में अभी तक बर्ड फ्लू का कोई भी मामला सामने नहीं आया हैं। मनुष्यों में इसके फैलने की संभावना कम रहती है। लेकिन फिर भी एहतियात बरतने की आवश्यकता है। यह वायरस सर्दियों में ज्यादा फैलता है। यह प्रवासी पक्षियों से देसी पक्षियों में, जानवरों और उनसे मनुष्यों में भी फैल सकता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी बिलासपुर डॉ. प्रकाश दड़ोच ने बताया कि अभी तक विश्व में 862 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। इनमें से 455 यानी 60 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है जो कि कोरोना से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभी तक पांच राज्यों केरल, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और प्रदेश के कांगड़ा में बर्ड फ्लू के मामले पाए गए हैं। बिलासपुर जिले में भी मृत कौए पाए गए हैं। इनके सैंपल जांच के लिए पशुपालन विभाग ने भेज दिए हैं। अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से इससे निपटने को तैयार है। सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्र में इस बारे में एहतियात बरतने के निर्देश दे दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने को तैयार है। बर्ड फ्लू के लक्षणों की जानकारी सभी को होनी आवश्यक है। बर्ड फ्लू के लक्षण 2 से 8 दिन तक आने लग जाते हैं। गले में खराश, छींकें आना, नाक बहना, बुखार, मांस पेशियों में दर्द, शरीर में ठंड लगना, पसीना आना, थकान होना और शरीर में कमजोरी आना इसके लक्षण हैं। गंभीर स्थिति में इसके कारण निमोनिया, ब्रोंकाइटिस आदि संक्रमण हो सकते हैं, जोकि मनुष्य के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकते हैं।
बताया कि बर्ड फ्लू से बचाव के लिए संक्रमित मुर्गियों, पक्षियों व जानवरों के संपर्क में आने से बचें। मीट, मछली, अंडे अच्छी तरह पकाकर खाएं। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से हाथ धोएं, पोल्ट्री फार्म में कार्य करते समय पीपीई किट पहनकर कार्य करें। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण आने पर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। आराम करें तथा दूसरों से नजदीकी संपर्क न करें, दूरी बनाए रखें। उन्होंने बताया कि लक्षण पाए जाएं तो निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।

बिलासपुर। जिले में अभी तक बर्ड फ्लू का कोई भी मामला सामने नहीं आया हैं। मनुष्यों में इसके फैलने की संभावना कम रहती है। लेकिन फिर भी एहतियात बरतने की आवश्यकता है। यह वायरस सर्दियों में ज्यादा फैलता है। यह प्रवासी पक्षियों से देसी पक्षियों में, जानवरों और उनसे मनुष्यों में भी फैल सकता है।

मुख्य चिकित्साधिकारी बिलासपुर डॉ. प्रकाश दड़ोच ने बताया कि अभी तक विश्व में 862 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। इनमें से 455 यानी 60 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है जो कि कोरोना से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभी तक पांच राज्यों केरल, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और प्रदेश के कांगड़ा में बर्ड फ्लू के मामले पाए गए हैं। बिलासपुर जिले में भी मृत कौए पाए गए हैं। इनके सैंपल जांच के लिए पशुपालन विभाग ने भेज दिए हैं। अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से इससे निपटने को तैयार है। सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्र में इस बारे में एहतियात बरतने के निर्देश दे दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने को तैयार है। बर्ड फ्लू के लक्षणों की जानकारी सभी को होनी आवश्यक है। बर्ड फ्लू के लक्षण 2 से 8 दिन तक आने लग जाते हैं। गले में खराश, छींकें आना, नाक बहना, बुखार, मांस पेशियों में दर्द, शरीर में ठंड लगना, पसीना आना, थकान होना और शरीर में कमजोरी आना इसके लक्षण हैं। गंभीर स्थिति में इसके कारण निमोनिया, ब्रोंकाइटिस आदि संक्रमण हो सकते हैं, जोकि मनुष्य के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकते हैं।

बताया कि बर्ड फ्लू से बचाव के लिए संक्रमित मुर्गियों, पक्षियों व जानवरों के संपर्क में आने से बचें। मीट, मछली, अंडे अच्छी तरह पकाकर खाएं। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से हाथ धोएं, पोल्ट्री फार्म में कार्य करते समय पीपीई किट पहनकर कार्य करें। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण आने पर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। आराम करें तथा दूसरों से नजदीकी संपर्क न करें, दूरी बनाए रखें। उन्होंने बताया कि लक्षण पाए जाएं तो निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।



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I am a doctor from Himachal. settled outside Himachal and hungry for news about Himachal.